भोपाल पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: ₹10,000 की नौकरी का लालच देकर नाबालिगों से दुष्कर्म करने वाले 78 वर्षीय प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद, 77.64 लाख का जुर्माना; महिला सहयोगी राबिया बी को 20 साल की सजा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक बेहद दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और रेप के मामले में अखबार के मालिक प्यारे मियां को बेहद सख्त सजा सुनाई है.

अदालत ने 78 साल के प्यारे मियां को कुल 10 बार उम्रकैद और 77.64 लाख रुपये के भारी-भरकम जुर्माने की सजा दी है. इस पूरे काले कारनामे में उसका साथ देने वाली उसकी महिला सहयोगी राबिया बी को भी अदालत ने 20 साल की कैद सुनाई है.

कैसे खुला राज?

यह पूरा खौफनाक सच जुलाई 2020 में तब सामने आया जब एक पीड़ित नाबालिग की काउंसलिंग की जा रही थी. बातचीत के दौरान उस बच्ची ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसे सुनकर सब दंग रह गए. पीड़िता ने बताया कि उसे भोपाल के शाहपुरा इलाके के एक फ्लैट में बर्थडे पार्टी के बहाने बुलाया गया था. वहां उसे जबरन शराब पिलाई गई और फिर प्यारे मियां ने उसका दैहिक शोषण किया. इस घटना के सामने आने के बाद एक-एक करके अन्य पीड़ित लड़कियों ने भी अपनी आपबीती बयां की और इस दरिंदगी की परतें खुलती चली गईं.

नौकरी का झांसा देकर फंसाता था शिकार

जांच में सामने आया कि आरोपी प्यारे मियां साल 2014 से मासूम बच्चियों को अपना निशाना बना रहा था. वह आर्थिक रूप से कमजोर या जरूरतमंद लड़कियों को हर महीने 10,000 रुपये की नौकरी दिलाने का लालच देता था. जब लड़कियां उसके झांसे में आकर उसके पास पहुंचती थीं, तो वह उनका शारीरिक शोषण करता था. इस घिनौने काम में उसकी सहयोगी राबिया बी भी उसका साथ देती थी, जिस पर आरोप पूरी तरह साबित हो चुके हैं.

अदालत का ऐतिहासिक फैसला

सरकारी वकील पीएन सिंह राजपूत के मुताबिक, पुलिस ने इस गंभीर मामले में ठोस सबूत जुटाए और गहनता से जांच की. इसके बाद प्यारे मियां और उसकी सहयोगियों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चला. विशेष पॉक्सो अदालत ने पोक्सो एक्ट और भारतीय दंड संहिता (IPC) की तमाम सख्त धाराओं के तहत फैसला सुनाते हुए प्यारे मियां को आठ मामलों में ताउम्र (मृत्यु तक) कैद और दो मामलों में उम्रकैद की सजा दी है. अदालत के आदेश के मुताबिक ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.यह फैसला न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिसने समाज में एक मजबूत संदेश दिया है कि बच्चों के साथ अपराध करने वालों को कानून किसी भी कीमत पर बख्शने वाला नहीं है.

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