
आलिंगन, आखिरी आलिंगन…मां का अपने बच्चे को सीने से चिपका कर बाहों में जकड़े रखना, ताकि लाइफ जैकेट के सहारे दोनों बच जाएंगे। सिवाय ममता के कुछ न बचा।
यह तस्वीर जबलपुर बरगी डैम क्रूज हादसे की है। एक 29 वर्षीय मां अपने 4 साल के मासूम बेटे को सीने से लगाकर बाहों में जकड़े हुए थी।

इस हादसे को लेकर कई प्रश्न है। पहला सटीक संख्या, क्योंकि टिकट सिर्फ वयस्कों के थे, जिनमें 29 नाम हैं, जबकि क्रूज पर 40 लोगों के होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
खराब मौसम की चेतावनी के बाद भी पर्यटकों को डैम में ले जाया गया।क्रूज पर केवल एक ऑपरेटर और एक असिस्टेंट मौजूद थे।
लाइफ जैकेट समय पर मुहैया नहीं करवाई गई। यात्रियों ने खुद जैकेट बांटना शुरू कर दिया था।
हालांकि, लाइफ जैकेट की क्वालिटी का अंदाजा इस तस्वीर से लगा सकते हैं।
यह हादसा नहीं, लापरवाही है। गैर इरादतन हत्या है।
…लेकिन क्या होगा? “कुछ नहीं” । बिलकुल कुछ भी नहीं। कुछ दिन बातें होंगी। लीपापोती होगी। ज्यादा से ज्यादा, कोई बलि का बकरा खोजा जाएगा। मामला खत्म।
क्या सुधार होगा?
उम्मीद तो नहीं लगती। बरसों से यही हालात हैं।

जबलपुर बरगी डैम से निकले माँ-बेटे के शव. 4 साल के बेटे को माँ ने सीने से लगा रखा था जिसे देख कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह और वहाँ मौजूद हर शख़्स की आँखे नम हो गई.