मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में जिस 20 साल पुराने क्रूज की वजह से 13 मौतें हुईं, उसे एमपी टूरिज्म कॉरपोरेशन क्लीन चिट दे रहा है। हादसे की मुख्य वजह अचानक आए ‘तूफान’ को माना जा रहा है।
जबलपुर के बरगी डैम में यह क्रूज डूबा था।
वहीं लाइफ जैकेट पहनने को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर टूरिज्म ने अजीब तर्क देते हुए कहा है कि लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा वाटर स्पोर्ट्स की गाइडलाइन का भी पालन नहीं किया गया। यह क्रूज साल 2006 का है। इस हिसाब से उसकी उम्र 20 साल हो चुकी है।
निगम के एडवाइजर राजेंद्र निगम ने बताया कि कुछ महीने पहले ही क्रूज के दोनों इंजन बदले थे। इससे उसकी उम्र 10 साल और बढ़ गई थी। क्रूज में कोई तकनीकी समस्या नहीं थी। भविष्य में ऐसा न हो, इसलिए वेदर फोरकास्ट को ठीक करेंगे।
निगम के एडवाइजर ने गोवा और विदेश में संचालित क्रूज का हवाला देते हुए कहा कि वहां भी लाइफ जैकेट क्रूज में उपलब्ध है, लेकिन पर्यटक घूमने के दौरान नहीं पहनते हैं।

बरगी क्रूज हादसे के बाद रेस्क्यू करते हुए टीम और मृतक ।
गाइडलाइन में सुरक्षा से जुड़े मापदंड स्पष्ट
सुरक्षा मानकों के आधार पर क्रूज या वोट पर सवार होते ही लाइफ जैकेट को पहनना अनिवार्य होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर स्पोर्टस द्वारा गाइडलाइन में तय किए गए मापदंड स्पष्ट हैं जिसमें लाइफ जैकेट भी एक है।
हालांकि इन सबके बीच CM डॉ. मोहन यादव के आदेश के बाद जांच कमेटी बना दी गई है। 6 कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।..

दो साल पहले हुई थी क्रूज की सर्विसिंग
एडवाइजर निगम का कहना है कि फाइबर रीइन्फोर्ड प्लास्टिक (एफआरपी) क्रूज की उम्र 20 से 25 साल होती है। यह अन्य क्रूज में सबसे सुरक्षित माना जाता है। बरगी डैम में डूबे इस क्रूज की दो साल पहले ओवरऑल सर्विसिंग कराई गई थी।
इंटरनेशनल मेनी टाइम आर्गेनेशनल के नॉर्म्स को भी फॉलो कर रहे थे। निगम के अनुसार, क्रूज का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस हुआ था। इनमें यात्रियों का इंश्योरेंस भी शामिल हैं।

एनजीटी के आदेश, फिर भी बोट चला रहे?
एडवाइजर निगम ने बताया, नेशनल ग्रीन टूब्नल (एनजीटी) के आदेश के पैरा 130 और 131 में भोपाल और रामसर साइड शिवपुरी में मोटर बोट का संचालन बंद करने का उल्लेख है। बाकी जगहों पर फोर स्ट्रोक इंजन की बोट चल सकती है। दुनिया के 36 देशों में फोर स्ट्रोक इंजन की बोटें चल रही हैं। भोपाल और शिवपुरी में नहीं चला रहे हैं।
हालांकि, एक्सपर्ट और एनजीटी में याचिका दाखिल करने वाले भोपाल के सुभाष सी. पांडे का कहना है कि एनजीटी ने उन सभी जलस्रोतों में मोटर बोट चलाने पर प्रतिबंध लगाया है, जिनका पानी पीने के लिए उपयोग किया जा रहा हो। बरगी डैम का पानी पीने के लिए उपयोग होता है। ऐसे में यहां पर गलत तरीके से क्रूज चलाया जा रहा था।

तूफान की पूरी जिम्मेदारी ?
तकनीकी रूप से पूरी तरह से ठीक होने के बावजूद क्रूज का डैम में डूब गया? इस सवाल पर एडवाइजर निगम कहते हैं कि प्रदेश में 16 बोट क्लब है। 18 साल से कहीं भी सिंगल एक्सीडेंट नहीं हुआ है। बरगी डैम में अचानक आए तूफान की वजह से क्रूज संभल नहीं सका था और पलट गया था।
आगे ऐसा न हो, इसके लिए नया सिस्टम तैयार कर हरे हैं। जहां भी बोट क्लब है, वहां पर वेदर फोरकास्ट के लिए लोकल हेड बनाएंगे। इसके लिए निगम के अफसरों से बात कर रहे हैं।

जांच कमेटी बनी, अब तक 5 पर कार्रवाई
हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण किया था। वहीं, मृतकों के परिवार से भी मुलाकात की थी। सीएम के दौरे के बाद सरकार ने क्रूज मामले में एक्शन लिया था। जिसमें क्रूज पायलट महेश पटेल, क्रूज हेल्पर छोटेलाल गोंड एवं टिकट काउंटर प्रभारी (FOA) बृजेंद्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की गई थी।
वहीं, होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब बरगी के मैनेजर सुनील मरावी को कार्य में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित किया गया था। रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को मुख्यालय अटैच कर विभागीय जांच शुरू की गई है। दूसरी ओर, एक कमेटी भी बनाई गई है, जो हादसे की मुख्य वजह की जांच कर रही है।
