14 जून को उद्धव ठाकरे ने मातोश्री में सांसदों की बैठक बुलाई। 9 में से सिर्फ 4 सांसद पहुंचे। तभी तय हो गया कि पार्टी में बड़ी फूट होने वाली है। 16 जून को 6 सांसद दिल्ली पहुंचे और 17 जून को लोकसभा स्पीकर से मिले। इसी दिन खबरें आईं कि दो सांसद संजय दीना पाटिल और ओमप्रकाश निंबालकर 18 जून को वापस शिवसेना (उद्धव गुट) की संसदीय बैठक में जा सकते हैं, लेकिन शाम को डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने जूम कॉन्फ्रेंस कॉल पर सभी सांसदों से बात की और वे शिवसेना (शिंदे गुट) में विलय के लिए तैयार हो गए।
सोर्स बताते हैं कि शिंदे की यही कॉल टर्निंग पॉइंट रही। शिंदे ने 6 सांसदों को अगले लोकसभा चुनाव में टिकट और फ्यूचर सिक्योर करने का भरोसा दिया। सभी सांसद आज, यानी 20 जून को शिंदे से मिलेंगे और लेटर जारी कर बताएंगे कि उन्होंने उद्धव की शिवसेना क्यों छोड़ी। सोर्स बताते हैं कि शिंदे का अगला टारगेट उद्धव गुट के तीन MLC और BMC के 65 पार्षद हैं।
2 बातें, जो उद्धव का साथ छोड़ने की वजह मानी जा रहीं
40 मिनट की बातचीत, शिंदे का सांसदों को मैसेज-आपके लिए हमेशा खड़ा हूं
शिवसेना से जुड़े सोर्स बताते हैं, ‘दिल्ली पहुंचे उद्धव गुट के 6 बागी सांसद लगातार एकनाथ शिंदे के संपर्क में थे। शिंदे ने करीब 40 मिनट उनसे बात की और कहा कि मैं हर फैसले में आपके साथ खड़ा हूं।’
‘सांसदों को संसदीय क्षेत्र में विकास के लिए पर्याप्त बजट के साथ अगले लोकसभा चुनाव में टिकट की गारंटी और Y-श्रेणी सुरक्षा देने का भरोसा दिया गया। शिंदे से वन-टु-वन बात करने के बाद सभी सांसदों का उद्धव गुट छोड़ने का फैसला और मजबूत हो गया।’
क्या संजय राउत और रश्मि ठाकरे की दखलंदाजी से फिर टूटी पार्टी
इसके बाद हमने बागी सांसदों से संपर्क करने की कोशिश की। दो से बात हुई। अभी सांसद औपचारिक तौर पर शिंदे गुट में शामिल नहीं हुए, इसलिए नाम सामने नहीं लाना चाहते। हमने दोनों सांसदों से पूछा कि उद्धव की पार्टी से अलग होने की सबसे बड़ी वजह क्या फंड न मिलना है।

शिवसेना (UBT) के मुखिया उद्धव ठाकरे पत्नी रश्मि ठाकरे और बेटे आदित्य ठाकरे के साथ शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के कार्यक्रम पर सायन के षणमुखानंद हॉल पहुंचे।
हमने पूछा- पार्टी में फैसले कौन लेता है? पहले सांसद जवाब में कहते हैं, ‘सबको पता है, संजय राउत पार्टी में सबसे ताकतवर नेता हैं। उद्धव उनके खिलाफ कुछ नहीं सुनते। संजय कई बार बिना सोचे समझे किसी को कुछ भी बोल देते हैं। अपमानजनक भाषा तो उनकी जुबान पर रहती है।’
‘हमारे पार्टी छोड़ने को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कैसी भाषा इस्तेमाल की, वो सबने देखा। फिर मीडिया से ये भी कहा कि इन शब्दों को काटे बिना चलाएं। जो मीडिया के सामने ऐसा बोल सकता है, वो पार्टी की बैठकों में कैसा बोलता होगा।’
क्या उद्धव की पत्नी रश्मि ठाकरे भी पार्टी के फैसलों में दखल देती हैं? जवाब मिला, ‘हां बिल्कुल, वो हर फैसले में शामिल होती हैं। उद्धव तक पहुंचने के लिए पहले उन्हीं से परमिशन लेनी पड़ती है। रश्मि ठाकरे भले सामना की एडिटर हों, पार्टी में कोई पद न हो, लेकिन पार्टी में उनका दबदबा बराबर है।’

17 जून की फोटो, जब शिवसेना (UBT) के सीनियर लीडर संजय राउत ने नई दिल्ली में बागी सांसदों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
MP फंड जारी न होना सांसदों की नाराजगी की वजह
शिवसेना (UBT) के सीनियर लीडर भी कंफर्म करते हैं कि महाराष्ट्र में गैर-महायुति सांसदों को खुलकर काम करने नहीं दिया जाता। सांसदों को मिलने वाला 2 करोड़ का फंड सीधा उनके अकाउंट में नहीं जाता। सांसद को क्षेत्र के विकास के लिए कलेक्टर के पास प्रोजेक्ट जमा करना होता है, तब पैसा रिलीज होता है।
कलेक्टर के फंड पास किए बिना सांसद क्षेत्र में काम ही नहीं करा पाएगा। जब काम नहीं होगा, तो वोट कैसे मिलेगा। अपना सियासी भविष्य देखते हुए 6 सांसद बागी बन गए।

7वें सांसद के बागी होने का दावा कितना सच
उद्धव खेमे (UBT) के सीनियर लीडर अरविंद सावंत बताते हैं कि शिंदे गुट की 6 नहीं 7 सांसदों पर नजर थी। राजाभाऊ प्रकाश वाजे को भी अप्रोच किया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
इसे लेकर हमने राजाभाऊ से भी बात की, तो उन्होंने कहा- ‘मुझे किसी ने अप्रोच नहीं किया। अरविंद साहब के पास ये जानकारी कहां से आई, मुझे नहीं पता नहीं।’
क्या आपको पार्टी में टूट होने का अंदाजा था? राजाभाऊ कहते हैं, ’14 जून की बैठक में मुझे लेकर सिर्फ तीन सांसद शामिल हुए थे। एक सांसद संजय दीना पाटिल वर्चुअली जुड़े थे। तभी लगा था कि कुछ तो गड़बड़ है क्योंकि इन सांसदों ने न जुड़ने की कोई सूचना नहीं दी थी।’
क्या किसी सांसद से बातचीत के दौरान नाराजगी दिखी। इस पर वे कहते हैं, ‘नहीं, मैं पहली बार MP बना हूं, तो किसी सांसद से ऐसे घरेलू संबंध नहीं।’

फिर मान लें कि आप उद्धव गुट में हैं? जवाब मिला-‘हां, अभी तो हूं। वैसे भी अब टूट हो गई है, दोबारा टूटने के लिए दो तिहाई सांसद चाहिए। अब जाना होगा, तो अरविंद जी को भी लेकर ही जा पाऊंगा। पर अभी मैं उद्धव जी के साथ हूं।’
संजय राउत और रश्मि ठाकरे का पार्टी में कितना दखल है? जवाब मिला- ‘संजय राउत तो दखल देंगे ही, रश्मि ठाकरे भी देती हैं। कोई बागी होता है, तो उसे जाने के कारण तलाशने पड़ते हैं। मीडिया को जवाब जो देना होता है।’
उद्धव की शिवसेना में बालासाहेब की विचारधारा नहीं
एकनाथ शिंदे के साथ 2023 में पार्टी छोड़ने वाली MLC नीलम गोहरे कहती हैं, ‘पार्टी कौन चला रहा है, ये सवाल नहीं है। सवाल ये है कि पार्टी चल कैसे रही है? मैंने बालासाहेब ठाकरे के साथ काम किया है। भले कुछ मुद्दों पर मतभेद रहा हो, लेकिन वे हिंदुत्व के मुद्दे पर NDA के साथ थे। अब ये हाल है कि हिंदुत्व शिवसेना (UBT) का मुद्दा ही नहीं।’

विधायक, सांसद अब क्या MLC और पार्षद टूटने की बारी
2023 में पहले ही उद्धव की पार्टी से 3 MLC शिंदे के साथ जा चुके हैं। अब उद्धव ठाकरे समेत 4 बचे हैं। सूत्रों की मानें तो 3 और MLC तोड़ने की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है। इसकी अगुआई पूर्व शिवसेना नेता और शिंदे की पार्टी में शिवसेना (UBT) से गए MLC करेंगे। सूत्र ने बताया कि शिवसेना (UBT) के 2 MLC शिंदे गुट के संपर्क में हैं। अगले एक-दो महीने में नए समीकरण सामने आ सकते हैं।
महाराष्ट्र के सीनियर जर्नलिस्ट बृजमोहन पांडेय कहते हैं, ‘आने वाले समय में ऑपरेशन टाइगर 3.0 के आसार दिख रहे हैं। इसमें शिवसेना (UBT) के 65 पार्षदों में फूट पड़ सकती है। वजह सिर्फ एक है फंड की कमी। महाराष्ट्र में गैर-महायुति पार्षदों को 25 लाख रुपए पार्टी फंड की तरफ से मिलते हैं। वहीं, महायुति से जुड़े पार्षदों को 2 से 3 करोड़ रुपए तक मिलते हैं।’

उद्धव सेना में बगावत फडणवीस पर पड़ सकती है भारी
महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटे हैं। 2024 में सबसे ज्यादा 13 सीटें कांग्रेस को मिलीं। BJP और शिवसेना (UBT) को 9-9, NCP (शरद पवार) को 8 और शिवसेना (शिंदे गुट) को सिर्फ 7 सीटों पर जीत मिली। NCP (अजीत पवार) एक सीट जीत पाई। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीता। इस तरह शिंदे की शिवसेना पांचवें नंबर पर है। उद्धव गुट के 6 सांसदों के आने से शिंदे और कांग्रेस के सांसदों की संख्या बराबर हो जाएगी।
पॉलिटिकल एनालिस्ट पांडुरंग म्हस्के कहते हैं, ‘NDA में BJP के 240 सांसद हैं। उसके बाद 16 सांसद TDP और 12 सांसद JDU के हैं। बंगाल चुनाव के बाद TMC के 20 सांसदों के आने से शिंदे का दावा थोड़ा कमजोर पड़ा था, लेकिन UBT के 7 सांसदों के आने से शिंदे के सांसदों की संख्या 13 हो जाएगी। इस तरह शिंदे की पार्टी NDA में चौथे नंबर की पार्टी हो जाएगी।’