हनी ट्रैप-2 कांड में गिरफ्तार कर जेल भेजी गई रेशू और श्वेता जैन से एसआईटी कोई खास राज नहीं उगलवा पाई है। बताते हैं आरोपी श्वेता हनी ट्रैप-1 कांड में जेल से छूटने के बाद भी दिल्ली में एक केंद्रीय मंत्री से लगातार संपर्क में रही हैं।

इस केस में नाम आने के बाद उसने रसूख का इस्तेमाल कर खुद को सख्ती से पूछताछ की जद से दूर रखा है। वहीं रेशू के मजबूत नेटवर्क के कारण अधिकारी उससे भी हनी ट्रैप के वीडियो, फुटेज व फोटो नहीं जुटा पाए हैं।
दोबारा रिमांड पर आई लेडी तस्कर अलका ने इंटेलीजेंस के हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा के साथ मिलकर पुलिस विभाग में खुद का मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया था। अलका एएसपी और एसीपी रैंक के अफसरों से संपर्क में रहती थी। कई अधिकारी जो इसके संपर्क में थे, वह रिटायर हो चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद भी वह उनसे कानूनी सलाह मशविरा करती रही है।
वीडियो और फोटो पर करोड़ों की डील करती थी रेशू बताते हैं रेशू हर फोटो, वीडियो पर करोड़ों की डील करती थी। आरोपियों से मिले 7 मोबाइल फोन को भोपाल फॉरेंसिक लैब भेजा है। बताते हैं श्वेता जैन, रेशू चौधरी, अलका और हेड कांस्टेबल विनोद के मोबाइल में कई वीडियो फुटेज हैं, जो आपस में शेयर किए गए हैं। इन्हीं के मोबाइल का एनालिसिस साइबर एक्सपर्ट कर रहे हैं।