एमपी कैडर ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा कैडर और दिल्ली में पदस्थ कई आईएएस-आईपीएस अफसर भी शामिल हैं।हैरान करने वाली बात ये है कि जमीन खरीदी के 16 महीने बाद ही इसी इलाके में 3200 करोड़ रुपए का वेस्टर्न बायपास मंजूर हो गया। फिर 10 महीने बाद जमीन का इस्तेमाल (लैंड यूज) बदलकर उसे रिहायशी कर दिया गया।
इसके बाद जमीन की कीमतें 11 गुना तक बढ़ गईं। अभी तक इसके लिए कोई सोसायटी रजिस्टर्ड नहीं हुई है। रिहायशी प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले जमीन सोसायटी के नाम करनी होगी या प्लॉट बांटने होंगे।

3 पॉइंट्स में जानिए खरीदी से लेकर कीमत बढ़ने तक का खेल
4 अप्रैल 2022- एक दिन में 2.023 हेक्टेयर जमीन खरीदी
- इस दिन 2.023 हेक्टेयर खेती की जमीन की एक साथ रजिस्ट्री हुई। इसमें 50 लोगों ने मिलकर जमीन खरीदी। रजिस्ट्री में इसकी कीमत 5.5 करोड़ रुपए दर्ज है, जबकि बाजार कीमत 7.78 करोड़ रुपए बताई गई।
- आईपीआर में इस जमीन को ‘like-minded officers’ यानी एक जैसी सोच वाले अफसरों की खरीदी गई प्रॉपर्टी बताया गया। दस्तावेजों के मुताबिक, 50 हिस्सों के पीछे असली खरीदार 41 लोग हैं।
31 अगस्त 2023… 16 महीने बाद बायपास मंजूर
- जमीन खरीद के 16 महीने बाद कैबिनेट ने वेस्टर्न बायपास को मंजूरी दी। अभी के रूट के हिसाब से बायपास इस जमीन से करीब 500 मीटर दूर है।
जून 2024… बायपास के 10 माह बाद लैंड यूज बदला
- जमीन जब खरीदी गई, तब वह खेती की जमीन थी। बायपास मंजूर होने के 10 महीने बाद यानी जून 2024 में इसे रिहायशी जमीन में बदल दिया गया।
- 2022 में 5 एकड़ यानी करीब 2,17,800 वर्गफीट खेती की जमीन करीब ₹81.75 प्रति वर्गफीट के हिसाब से खरीदी गई थी। जून 2024 में डायवर्जन के बाद इसकी कीमत ₹557 प्रति वर्गफीट हो गई।
इससे 5 एकड़ जमीन की कीमत करीब ₹12.13 करोड़ पहुंच गई। अभी बाजार में इसकी कीमत ₹2500 से ₹3000 प्रति वर्गफीट बताई जा रही है। यानी कुल जमीन की कीमत अब ₹55 करोड़ से ₹65 करोड़ के बीच है।