इंदौर में पानी की किल्लत से विवाद बढ़ गया है। पार्षदों के बीच में विवाद चल रहे हैं और वहीं निगम के कर्मचारियों, वाल्वमैन से लेकर टैंकर चालकों पर हमले होने लगे हैं। पानी नहीं देने पर टैंकर चालकों पर पथराव तक की नौबत आ गई है। विधायक खुद मैदान में विरोध में उतर रहे हैं।

विधायक महेंद्र हार्डिया कार्यक्रम छोड़ गए
रविवार, 17 मई को पानी के मुद्दे पर विधानसभा इंदौर पांच के वार्ड 41 व 37 में हंगामा हो गया। वहीं वार्ड 41 के एक भूमिपूजन कार्यक्रम में विधायक महेंद्र हार्डिया कार्यक्रम छोड़कर ही चले गए। कारण था कि जलसंकट के कारण लोग उनके घर पर रोज पहुंच रहे हैं।
इस पर विधायक उखड़ गए और बोले कि जलसंकट ने परेशान कर दिया है, पहली बार इस तरह का संकट देख रहे हैं। टंकियां ही नहीं भर पा रही हैं। नहीं करना भूमिपूजन-वूजन। ऐसा कहकर वह चले गएसमस्या हल नहीं हुई ता महापार क घर जाऊंगावहीं विधायक ने कहा कि पानी की समस्या बहुत है। मैं 20 साल से विधायक हूं लेकिन ऐसे हालात पहले नहीं हुए। टैंकर टूटे हुए दिए, टंकियां भर नहीं पा रही हैं। इसलिए मैंने महापौर को सब बोल दिया। अब तय किया है कि यदि पानी की समस्या हल नहीं हुई तो रोज सुबह महापौर के घर जाकर बैठ जाऊंगा।
इधर पार्षद आपस में उलझ गए
उधर विधायक गोलू शुक्ला ने भी पानी को लेकर अपने क्षेत्र की बैठक बुलाई थी। इसमें बीजेपी के पार्षद और उनके प्रतिनिधि आपस में उलझ गए। पार्षद मृदुल अग्रवाल और पार्षद रूपा पाण्डेय के वार्ड में एक ही वाल्व से सप्लाई होती है। एक-दूसरे पर आरोप हैं कि उनके एरिया में कम और दूसरे के एरिया में है। दोनों ने कहा कि यह नह बैठ जाएंगे।
कांग्रेस पार्षद भी सड़क पर
कम और दूसरे के एरिया में अधिक सप्लाई होती है। दोनों ने कहा कि यह नहीं रुका तो धरने पर बैठ जाएंगे।
कांग्रेस पार्षद भी सड़क पर
उधर कांग्रेस पार्षद सोनिला मिमरोट ने भी पानी की समस्या आने पर निगम के वाल्वमैन से बोलकर वाल्व खुलवाकर सप्लाई शुरू कराई। वहीं पार्षद यशस्वी अमित पटेल भी सोमवार, 18 मई की सुबह धरने पर बैठ गईं और पानी को लेकर प्रदर्शन किया। इसके पहले भी कांग्रेस ने सभी जोन ऑफिस पर पानी के संकट को लेकर धरना, प्रदर्शन किया और मटके फोड़े थे।
क्या है पानी की स्थिति
वहीं पानी को लेकर अपर आयुक्त (आईएएस आशीष पाठक) ने कहा कि अभी 337 एमएलडी पानी इंदौर को मिल रहा है और नर्मदा से सप्लाई नियमित है। संकट बोरिंग सूखने से है। इंदौर में शासकीय 6500 बोरिंग हैं जो सूख गए हैं।वहीं शहर का करीब 20 फीसदी एरिया है जहां नर्मदा लाइन नहीं है, वहीं पर संकट है। निगम हर दिन 650 टैंकर के जरिए इन एरिया में सप्लाई कर रही है। हर टैंकर एक दिन में पांच ट्रिप लगा रहा है। इसके जरिए करीब 18-20 एमएलडी पानी दिया जा रहा है।
महापौर बोले बोरिंग सम्तने मे परेशानी
वहीं महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इस साल बोरिंग जल्द सूख गए। इसलिए अधिक संकट है। नर्मदा पानी पर निर्भरता बढ़ गई है
जलकर 50 फीसदी बढ़ा चुका है निगम
इंदौर नगर निगम पानी की बेहतर व्यवस्थाओं के नाम पर जुलाई 2024 में ही जलकर में सीधे 50 फीसदी की बढ़ोतरी कर चुका है। इसे 200 रुपए से बढ़ाकर प्रति माह 300 रुपए किया जा चुका है। जबकि निगम द्वारा इंदौर में जल एक दिन छोड़कर एक दिन दिया जाता है।यानी महीने में केवल 15 दिन ही जल की सप्लाई होती है। हालांकि इंदौर में पानी 70 किमी दूर से नर्मदा से लिफ्ट करके लाया जाता है। साथ ही, इस पर बिजली का खर्च ही हर माह करीब 20-25 करोड़ रुपए कारण इंदौर में पानी
अमृत टू से ही मिलेगी राहत
हाल ही में इंदौर नगर निगम ने अमृत टू को लॉन्च किया है। करीब 2100 करोड़ की इस योजना के जरिए इंदौर में पानी की सप्लाई दोगुनी कर 900 एमएलडी प्रति दिन करने का लक्ष्य है। हालांकि इसमें अभी दो-तीन साल का समय लगेगा। लेकिन यह प्रोजेक्ट साल 2050 तक इंदौर की 65 लाख की संभावित आबादी को देखते हुए अहम साबित होगा।