इन दरिंदों को जितनी क्रूरतम सजा मिले, उतनी ही कम है… कौशल किशोर चतुर्वेदी

इन दरिंदों को जितनी क्रूरतम सजा मिले, उतनी ही कम है…
उमराव जान फिल्म में जावेद अख्तर द्वारा लिखे गए गीत की पहली दो पंक्तियां ‘अब जो किए हो दाता ऐसा न कीजो, अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो…’ ही शायद उस नाबालिग के मन में रही होंगी, जिसे दरिंदों की क्रूरतम, घृणित, अमानवीय, राक्षसी कृत्य से मासूम बेटी को असमय ही काल कवलित होने को मजबूर कर दिया। श्रीगंगानगर शहर में समाया गंगा शब्द शायद उस वक्त खुद को कोस रहा होगा। 13 साल की मासूम की बोटी बोटी नोचकर इन हत्यारों ने, इन कुत्तों ने, इन दरिंदो ने, इन दैत्यों ने, उस बेचारी के मन में जीने की कोई इच्छा बाकी नहीं छोड़ी थी। एक वायरल वीडियो में जब उसकी परिजन मासूम को ढांढस बंधाती है कि उसे कुछ नहीं होगा, तब भी वह एक ही बात दोहराती है कि मैं मर जाऊंगी, लेकिन इन सबको सजा मिलेगी। इन दरिंदों की कितनी नीच मानसिकता है कि दरिंदगी करते समय इन हरामखोरों के सामने इनके घर की बेटियों के चेहरे भी नहीं आए। दु:ख की बात यह है कि कानून तब भी ऐसे दरिंदों को भी अपील, दलील और वकील के पूरे अवसर देता है। बेहतर तो यही होता कि इन दरिंदों को इनके परिवार के सामने क्रूरतम मौत के हवाले किया जाता। जिसमें इनके घर की बेटियां भी अपने बाप की लाश पर थूककर किनारा कर लेतीं। और इन दरिंदों की लाशों की बोटी-बोटी कुत्तों द्वारा चीथ-चीथ कर खाने के लिए छोड़ दी जाती। इनकी दरिंदगी पर तो बदतर से बदतर मौत भी खुद से घृणा करने लगे। यही कहा जा सकता है कि हे ईश्वर आखिर कलयुग का और कौन सा दौर सामने आना बाकी है। यह पृथ्वी भी आखिरकार ऐसे दरिंदों को निगल क्यों नहीं जाती?
भारत के 2047 में विकसित होने की कल्पना की जा रही है। 2047 तक में अभी 21 साल का फासला बाकी है। क्या इस तरह की घटनाएं यही चेतावनी नहीं दे रही हैं कि यदि भारत में बेटियां और खासतौर से नाबालिग बेटियां ही सुरक्षित नहीं है। तब फिर किस विकसित भारत की कल्पना की जा रही है। और फिर तब नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी सरकारी कोशिशें क्या महिला सशक्तिकरण के नाम पर खोखले दावों से ज्यादा कुछ नहीं हैं। वास्तव में राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म के इस घिनौने अपराध ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। प्रियंका चोपड़ा की बहन मीरा चोपड़ा से लेकर सोनू सूद और संजय गुप्ता ने अपराधियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है। नाबालिग बच्ची के साथ होटल के कमरे के भीतर दरिंदगी की इस घटना ने सुनने वालों की रूह कंपा दी है। प्रियंका चोपड़ा की बहन मीरा चोपड़ा से लेकर सोनू सूद, संजय गुप्ता जैसी हस्तियों ने इस घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए आरोपियों के लिए मौत से भी बदतर सजा की मांग की है।
मीरा चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर दुख जताया है और कहा है, ‘मैं उसके बारे में सोचने से खुद को रोक नहीं पा रही हूं। 13 साल की बच्ची और 32 आदमियों ने उस पर बेरहमी से हमला किया। उसने अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष किया और आज वह जंग हार गई। इस बात को कैसे पचाएं? किस तरह के दरिंदे ऐसा करते हैं? किस तरह का समाज इसे होने देता है? इन आदमियों को मौत की सजा से कम कुछ भी नहीं मिलना चाहिए। एक बच्ची के साथ इस तरह की क्रूरता के अपराध के लिए हमारी न्याय व्यवस्था में सबसे कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। उसे स्कूल, दोस्तों और सपनों की चिंता करनी चाहिए थी, न कि अपनी जान बचाने के लिए लड़ना चाहिए था। मैं गुस्से में हूं। मेरा दिल टूट गया है। और मुझे शर्म आती है कि हम अपनी बेटियों को न्याय दिलाने में लगातार नाकाम हो रहे हैं।’ सोनू सूद बोले- दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने दुख जताते हुए कहा है, ‘श्री गंगानगर की भयावह घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। एक 13 वर्षीय बच्ची पर अकल्पनीय क्रूरता बरती गई है। मेरा खून खौल रहा है। दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। कोई रहम नहीं। कोई देरी नहीं। हम कब तक और कितने निर्दोषों की जान गंवाएंगे, इससे पहले कि हम कहें, बस बहुत हो गया, उस नन्ही बच्ची और उसके परिवार के लिए मेरा दिल टूट रहा है।’
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में दुष्कर्म के मामलों में राजस्थान सबसे ऊपर रहा, जहां 4871 मामले दर्ज हुए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 3209, महाराष्ट्र में 3091, मध्य प्रदेश में 3061 और हरियाणा में 1391 मामले दर्ज किए गए। एनसीआरबी आंकड़ों में यह भी कहा गया है कि अधिक आबादी वाले राज्यों में कुल मामलों की संख्या स्वाभाविक रूप से ज्यादा हो सकती है। फिलहाल सबसे यक्ष प्रश्न यही है कि उस 13 वर्षीय बच्ची की आत्मा को कभी शांति मिलेगी? शायद उन सभी 32 बदमाशों को सरेआम फांसी और क्रूरतम मौत की सजा दी जाए तब भी उस मासूम की आत्मा शान्त नहीं हो पाएगी। वास्तव में इन दरिंदों को जितनी क्रूर सजा मिले, उतनी ही कम है… मन में बार बार यही पीड़ा हो रही है कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” की भावना वाले भारत देश का 21 वीं सदी में आखिर क्या हाल हो रहा है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं