टीआई दिलीप पुरी की हत्या से खुला शराब तस्करी सिंडिकेट: 3 दुकानों से गुजरात तक थ्री लेयर सिक्योरिटी में पहुंचती थी खेप, हर ट्रक से 10 लाख की कमाई; 13 आरोपी हिरासत में

खातेगांव टीआई दिलीप पुरी को कुचलने वाला ट्रक अवैध शराब की खेप लेकर गुजरात जा रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस तस्करी के तार हरदा से गुजरात तक फैले करोड़ों रुपए के सिंडिकेट से जुड़े थे।

इसकी शुरुआत हरदा जिले के टिमरनी की तीन लाइसेंसी शराब दुकानों से होती थी। सोडलपुर रोड, हरदा रोड और रहटगांव स्थित इन दुकानों के लाइसेंस पाटेन्द्र जायसवाल के नाम पर थे, जबकि कारोबार चार पार्टनर मिलकर चला रहे थे।

थ्री लेयर सिक्योरिटी में कागजों में वैध दिखने वाला शराब का स्टॉक कथित तौर पर अवैध तरीके से गुजरात भेजा जाता था। हर ट्रक पर 8 से 10 लाख रुपए की कमाई का गणित भी सामने आया है

4 पार्टनर चलाते थे सिंडिकेट, तय था कमाई का हिस्सा

पुलिस जांच के मुताबिक, इस सिंडिकेट का मुख्य संचालक राहुल जायसवाल था। वह टिमरनी की दुकानों से शराब का स्टॉक उठाने, सप्लाई रूट तय करने और तस्करी से मिलने वाली रकम का हिसाब रखता था।

पूरी रकम पहले राहुल के पास जमा होती थी। इसके बाद पार्टनर्स में बांटी जाती थी। राहुल, मनीष और मोहिन जायसवाल को 30-30% हिस्सा मिलता था, जबकि दुकानों के लाइसेंसधारक पाटेन्द्र जायसवाल को 10% दिया जाता था।

1,400 पेटियां शराब की खेप, एक ट्रक से 10 लाख तक मुनाफा

खातेगांव में पकड़े गए ट्रक में करीब 1,400 पेटियां शराब लदी थीं। यह खेप टिमरनी की सोडलपुर रोड स्थित दुकान से लोड की गई थी। इसे देवास के रास्ते करीब 700 किलोमीटर दूर गुजरात पहुंचाया जाना था।

शराब कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, गुजरात में शराब की मांग के चलते एक ट्रक की खेप सीमा पार पहुंचाने पर 8 से 10 लाख रुपए तक का मुनाफा होता था। इसकी वजह मध्यप्रदेश में खरीदी गई शराब को गुजरात के अवैध बाजार में कई गुना अधिक कीमत पर बेचना था।

लाइसेंसी दुकानों से गुजरात तक ऐसे पहुंचती थी शराब

आबकारी नियमों के मुताबिक, हर दुकान के लिए शराब के स्टॉक, बिक्री और परिवहन का क्षेत्र तय होता है। पुलिस जांच के अनुसार, सिंडिकेट के लोग दुकानों से वैध स्टॉक उठाकर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों या बिना परमिट के उसे तय क्षेत्र से बाहर भेजते थे।

रास्ते में पुलिस की जांच से बचने के लिए 3 लेयर का सुरक्षा तंत्र और मुखबिरों का नेटवर्क काम करता था। ट्रकों की पहचान छिपाने के लिए कई बार दूसरे सामान के परिवहन की आड़ ली जाती थी।

19 महीने पहले भी पकड़ी गई थी शराब की खेप

टिमरनी की दुकानों से शराब तस्करी का मामला पहले भी सामने आ चुका है। करीब 19 महीने पहले, 1 मार्च को टिमरनी पुलिस ने इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे पर सुदामा होटल के पास एक ट्रक पकड़ा था।

उसमें 23.60 लाख रुपए कीमत की गोवा व्हिस्की की 4,332 बोतलें (361 पेटियां) मिली थीं। उस मामले के तार भी टिमरनी से जुड़े थे। अब ताजा मामले में मिले ‘बैच नंबर 025’ ने एक बार फिर टिमरनी की दुकान को जांच के दायरे में ला दिया है।

ट्रक में शराब छिपाने के लिए एक अलग कंटेनर बनाया गया था।

शराब तस्करी रोकने में आबकारी और पुलिस की चूक?

टीआई की मौत और शराब तस्करी के इस मामले ने आबकारी और पुलिस विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

  • आबकारी विभाग की चूक: दुकानों के वास्तविक स्टॉक और बिक्री का नियमित मिलान नहीं किया गया। असामान्य खरीद-बिक्री पर निगरानी नहीं रखी गई और परिवहन परमिट का मौके पर सत्यापन नहीं हुआ।
  • पुलिस की चूक: हाईवे पर संदिग्ध वाहनों की निगरानी में कमी रही। कार्रवाई केवल ड्राइवर और ट्रक तक सीमित रही, जबकि तस्करी के पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी था।

13 आरोपी हिरासत में, टीआई के परिवार को 1 करोड़ की सहायता

पुलिस ने टिमरनी की तीनों शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर उन्हें सील कर दिया है। मामले में अब तक 13 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) उपेंद्र जैन के मुताबिक, शराब तस्करी नेटवर्क की पहचान कर ली गई है।

शराब कहां से आई, कहां भेजी जा रही थी और इसमें कौन-कौन शामिल था, इसकी जानकारी पुलिस को मिल चुकी है। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है।

इस मामले में हरदा के सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमरसिंह बघेल और दो आरक्षकों अरुण कुम्बरे व कृष्णपाल सिंह डोडिया को निलंबित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टीआई दिलीप पुरी की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति के तहत सब इंस्पेक्टर (SI) का पद और परिवार को 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

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