इस जाम से कब मिलेगी आजादी: रीगल से मधुमिलन तक थमा शहर, 45 मिनट फंसी एम्बुलेंस; रैली में पुलिस बल तैनात फिर भी वैकल्पिक रास्ते चोक

शहर में शुक्रवार को एक बार फिर यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। दोपहर 1 से 3 बजे के बीच रीगल तिराहा, मधुमिलन चौराहा, दवा बाजार और आसपास की प्रमुख सड़कों पर वाहन रेंगते रहे। सबसे गंभीर स्थिति मधुमिलन चौराहे पर बनी, जहां एम्बुलेंस और स्कूल बसें जाम में फंसी रहीं।

आरएनटी मार्ग पर फंसी रही एम्बुलेंस (घेरे में

हैरानी की बात यह है कि शहर में निकली एक रैली के लिए तीन से चार थानों का पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन मधुमिलन जैसे व्यस्त चौराहे पर यातायात नियंत्रित करने के लिए इक्का-दुक्का पुलिसकर्मी ही नजर आए। यहां एक एम्बुलेंस करीब 45 मिनट (पौन घंटे) तक फंसी रही, जिसे अन्य वाहनों के उलझने के बीच बेहद मशक्कत के बाद निकाला जा सका। इससे पहले गुरुवार को भी शहर में चार घंटे तक लंबा जाम लगा था।

रीगल और सैफी होटल तक वैकल्पिक रास्ते भी चोक

एक ही इलाके में जाम से बचने के लिए लोगों ने कई वैकल्पिक मार्ग अपनाए, लेकिन वाहनों का दबाव बढ़ने से वे रास्ते भी पूरी तरह चोक हो गए। इससे स्पष्ट है कि केवल रूट डायवर्शन पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यस्त चौराहों पर तत्काल अतिरिक्त बल की तैनाती और मौके पर मैनुअल ट्रैफिक मैनेजमेंट जरूरी है। जैसे-तैसे जब मधुमिलन चौराहे पर जाम छंटा, तो दो घंटे बाद रीगल तिराहे पर स्थिति बिगड़ गई। पत्थर गोदाम और सैफी होटल वाले इलाके में भी गाड़ियां फंसी रहीं। लोगों का कहना है जगह-जगह खुदाई से हालात और बिगड़ गए हैं।

5 किमी अतिरिक्त घूमे, फिर भी नहीं पहुंच सके

बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े पीयूष गर्ग ने बताया कि उन्हें संयोगितागंज थाने के पास से मधुमिलन जाना था। वे पहले सेठी अस्पताल के पास से दवा बाजार की ओर गए, लेकिन गलियों में भी जाम मिला। करीब 10 मिनट इंतजार के बाद उन्होंने रास्ता बदला और भाजपा कार्यालय होते हुए एमवाय चौराहा पहुंचे, लेकिन वहां भी जाम था। फिर गीता भवन होते हुए सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल पहुंचे। आधा घंटा इंतजार के बाद यू-टर्न लेकर वे इंद्रप्रस्थ टॉवर और फिर रीगल पहुंचे। 5 किमी चक्कर लगाने के बाद आखिरकार उन्हें काम स्थिगित करना पड़ा।

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