जवाबदेही तय करने में इतनी देर क्यों लगी… कौशल किशोर चतुर्वेदी

जवाबदेही तय करने में इतनी देर क्यों लगी…
हाई पॉलिटिकल ड्रामा और कॉकरोच जनता पार्टी के उग्र आंदोलन के बाद आखिरकार मोदी सरकार को डैमेज कंट्रोल में पसीना बहाना ही पड़ा। जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की सक्रियता से एक तरफ सोनम वांगचुक का अनशन टूट गया तो कोकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ताओं के साथ भी बैठक संपन्न हो गई। वहीं एनटीए ने भी सक्रिय होकर
जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई कर दी। आखिर इतना इंतज़ार क्या सिर्फ इसलिए हो रहा था कि पहले कॉकरोच जनता पार्टी की ताकत को परखा जाए। और सोनम वांगचुक के अनशन में कितना दम है, इसका
आकलन किया जाए। शायद 12 साल के दौरान यह पहला वाकया है जब सीधे तौर पर मोदी सरकार की समझौतावादी प्रकृति उजागर हो रही है। और इसे मोदी सरकार के मैनेजमेंट का अच्छा नमूना नहीं माना जा सकता। और अभी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा बाकी है। वह यह है कि कॉकरोच जनता पार्टी अभी भी धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी है, तो मोदी सरकार आखिरी दम तक इस्तीफे की बात न मानने पर आमादा है। इस सब के बीच फिर वही बात सामने आती है कि आखिरकार मोदी सरकार खुद को जिम्मेदार बताने और जवाबदेही तय करने में इतनी देर क्यों लगा रही थी?

कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन के बीच मोदी सरकार ने पहली वापसी तब की जब सोनम वांगचुक को अनशन तोड़ने पर राजी कर लिया। सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में गुरुवार 23 जुलाई 2026 की देर रात अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। एक्स पर हॉस्पिटल की तस्वीर साझा करते हुए सोनम वांगचुक ने लिखा, “अभी कुछ देर पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मैंने 26 दिनों बाद अपना उपवास तोड़ा।” उन्होंने कहा, “इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसद मुझसे मिलने आए थे या उन्होंने पत्र लिखकर मुझसे उपवास खत्म करने की अपील की थी। यह फैसला अलग-अलग शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए लिया गया है।” तब तक आप सभी से अपील है कि किसी भी तरह की हिंसा को कहीं भी न होने देने के लिए पूरी तरह सतर्क रहें।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नई दिल्ली में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन जारी रखे हुए है। पेपर लीक से 22 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए थे। सीजेपी के नेतृत्व में यह आंदोलन 20 जून 2026 को शुरू हुआ था। और 28 जून 2026 को सोनम वांगचुक ने अनशन शुरू कर दिया था। मांग यही थी कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय की जाए, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
अभिजीत दिपके ने सोनम वांगचुक का आभार जताते हुए कहा कि हमें बेहद राहत और कृतज्ञता है कि सोनम सर ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। सर, आपके असाधारण साहस और बलिदान के लिए धन्यवाद। अपनी जान जोखिम में डालकर आपने पूरे देश की अंतरात्मा को जगाया। आपका जीवन इस देश के लिए अमूल्य है। तो यह बात वास्तव में सही है कि सोनम वांगचुक की वजह से कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन ने इतनी ऊँचाई हासिल कर पाई है। और दूसरे नजरिए से देखा जाए तो सोनम वांगचुक ने खुद को अन्ना हजारे होने से बचा लिया है। क्योंकि अगर इस आंदोलन की पीठ पर सवार होकर कॉकरोच जनता पार्टी ने भी सत्ता का सपना देखा है, तो उसका हश्र भी सत्ता की बुराइयों के साथ ही होना तय है।

अब कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर मोदी सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। इस बीच अभिजीत दिपके ने भी साफ कर दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक यह आंदोलन जारी रहेगा। केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी की मांगों पर 25 जुलाई तक का समय मांगा है। दिल्ली के बिठ्ठल भाई पटेल हाउस में सीजेपी और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने यह जानकारी दी। इस बातचीत में सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह शामिल हुए थे। जबकि सीजेपी की ओर से उनके प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हुए। यह बातचीत क़रीब दो घंटे तक चली। इसमें सीजेपी ने अपनी प्रमुख मांगे सरकार के सामने रखीं.
इनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा, नीट पेपर लीक की वजह से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ का मुआवजा भी शामिल है। बातचीत के बाद सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, “पूरे देश का नज़रिया है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए या उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए। सरकार ने इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए कल दोपहर तक का समय मांगा है। हमने सरकार को बता दिया है कि पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं और ये बढ़ते ही जाएंगे। अगर प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया तो ये प्रदर्शन और व्यापक होंगे।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करके पेपर लीक के बाद अपनी सरकार के उठाए गए क़दमों का जिक्र किया था।
उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार ऐसे कड़े कदम उठाएगी, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। और अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए 47 अधिकारियों को टर्मिनेट कर दिया है और नई भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। यह कदम परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। तो फिर सवाल वही है कि आखिरकार जवाबदेही साबित करने के लिए क्या सरकार इसी वक्त का इंतजार कर रही थी और इसीलिए जवाबदेही तय करने में इतनी देर लगी है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं