तुम तो आनंद करो ‘लखन’… पशु पालवे को काम कर ले तुमरो भैया ‘मोहन’… कौशल किशोर चतुर्वेदी

तुम तो आनंद करो ‘लखन’… पशु पालवे को काम कर ले तुमरो भैया ‘मोहन’…
मोहन सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद इस सरकार में दूसरी बार किसी मंत्री का विभाग छीना गया है। पहली बार की वजह कुछ कुछ साफ नजर आ रही थी कि रामनिवास रावत को कैबिनेट मंत्री बनाकर वन एवं पर्यावरण विभाग की सौगात देनी थी। इसलिए 21 जुलाई 2024 को मंत्री नागर सिंह चौहान से यह मंत्रालय छीन लिया गया था। नागर सिंह चौहान वन विभाग छीने जाने से नाराज हुए थे। उनकी शिकायत थी कि वन विभाग छीनने से पहले उनसे बात नहीं की है। सीएम ने सीधे मंत्रालय बदल दिया है। 22 जुलाई 2024 को तो मंत्री नागर सिंह चौहान ने इस्तीफे की बात तक कह दी थी। 23 जुलाई 2024 को कैबिनेट बैठक शामिल होने की बजाय उन्होंने दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात की थी। हालांकि, उसके बाद उनके तेवर ठंडे पड़ गए थे। और तब उन्होंने अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री के पद से बमुश्किल संतोष किया था। और दो साल बाद एक बार फिर जुलाई के महीने में लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग छीनकर, उन्हें आनंद विभाग आवंटित कर संतोष करने के लिए मजबूर किया गया है। नागर सिंह चौहान के मामले में भी वजहों का आकलन किया गया था और अब लखन पटेल के मामले में वजहों के कयास लगाए जा रहे हैं। हर फैसले के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नाराजगी एक आम वजह है तो गुजरात फैक्टर हमेशा ही काम में आता है। और अमित शाह को जोड़कर अमूल और गुजरात एक साथ मिलकर डबल पावर दिखा रहे हैं। खैर आने वाले समय में हर जुलाई के महीने में भाजपा के नेताओं को बहुत संभलकर चलने की जरूरत है। जुलाई का महीना भाजपाइयों के लिए खतरे की घण्टी बनकर दिल की धड़कनों को तेज करने वाला बन गया है। जुलाई के महीने में ही दतिया से उपचुनाव में प्रचार-प्रसार कर रहे और नामांकन पत्र खरीद चुके कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने जिस तरह निराश किया है, वह किसी से छिपा नहीं है। दतिया में भी आक्रोश बहुत दिखा था, लेकिन तीन दिन में ही सब कुछ शांत हो गया। डॉ. नरोत्तम मिश्रा मंच से यह कहते नजर आए कि भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए वह घर-घर शीश झुकाएंगे। और अब उसके चार दिन बाद ही लखन पटेल को आनंद करने के लिए सरकार ने उनसे पशुपालन एवं डेयरी विभाग छीनकर उन्हें यही अहसास दिलाया है कि भाजपा में एक पल के बाद भी किसी के पास पद पर रहने की कोई गारंटी नहीं है। या कौन सा पद बचेगा, यह कोई नहीं कह सकता। और मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार का ‘मोहन युग’ इसके लिए खासतौर पर जाना जाएगा। खास बात यह भी है कि किसी के पास आक्रोशित होने की गुंजाइश भी नहीं है। और कांग्रेस नेता भले ही भाजपा में आते रहें लेकिन भाजपा से उपेक्षित नेताओं के लिए कहीं और जाने का विकल्प भी बहुत दुष्कर है।
तो बात आज के मुद्दे की। मध्य प्रदेश सरकार ने 14-15 जुलाई देर रात एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला लेते हुए पशुपालन मंत्री लखन पटेल से उनका महत्वपूर्ण विभाग वापस ले लिया है। सरकार द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार अब लखन पटेल के पास अब आनंद विभाग की जिम्मेदारी रहेगी। पशुपालन जैसा अहम विभाग उनसे वापस लिए जाने के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। बड़ी बात यह भी है कि मुख्यमंत्री ने पटेल से विभाग लेकर फिलहाल अपने पास रख लिया है। देर रात जारी गजट नोटिफिकेशन के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। मंत्री लखन पटेल का कहना है कि यह मुख्यमंत्री का विशेष अधिकार है कि वे किसे कौन सा विभाग देना चाहते हैं। मुझे इसकी जानकारी नहीं है कि मेरे से यह विभाग क्यों वापस लिया गया है। मंत्री के बयान के बाद सरकार के इस अप्रत्याशित फैसले के पीछे की वास्तविक वजह पर अलग-अलग खोजी राय सामने आ रही हैं। लेकिन इसके बाद अब एक बात तय हो गई है कि मंत्रिमंडल विस्तार जब भी हो, तब किसी के विभाग में भी कांट-छांट होने पर कोई आश्चर्य व्यक्त नहीं किया जाएगा। और मंत्रिमंडल से बाहर होने वाले चेहरे भी खुशी-खुशी अपनी गाड़ी में बैठकर अपने-अपने घर रवाना हो जाएंगे।
और विभाग छिनने के बाद लखन पटेल की प्रतिक्रिया से सहमति जताई जा सकती है कि विभाग बदलना या नया देना मुख्यमंत्री का विषय है और इसको लेकर उन्हें कोई शिकायत नहीं है।लेकिन राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है कि शाह, अमूल और गुजरात त्रिकोण ने लखन पटेल के जीवन में नया मोड़ ला दिया है। वहीं आम चर्चा यह भी है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्राथमिकता में गौपालन है और गोवंश के लिए गोशालाओं को लेकर भी संघ विशेष तौर पर सक्रिय है। ऐसे में यह गोवंश और गोशालाओं का विषय लखन पटेल पर भारी पड़ गया है। संघ की नाराजगी के चलते मोहन को लखन के खिलाफ मानसून सत्र के पहले ही रातों-रात यह अधिसूचना जारी करवानी पड़ी। संघ और शाह दोनों ही बराबर पावर रखते हैं और ऐसे में वजह कोई भी हो लेकिन बात तय थी कि लखन को विभाग से विदा करना ही पड़ेगा। वैसे इससे एक बात तय हो गई है कि अमूल, गुजरात और गोशालाएं भी किसी मंत्री का विभाग छीन सकती हैं, यह मध्य प्रदेश के राजनैतिक इतिहास में याद रखा जाएगा। हालांकि देखा जाए तो पशुपालन एवं डेयरी विभाग को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार बहुत गंभीर है। दुग्ध उत्पादन को बढ़ाकर 20 फीसदी तक पहुंचाना सरकार का विशेष लक्ष्य है। और इसके साथ ही इस विभाग द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में योजनाओं का क्रियान्वयन भी सरकार के एजेंडे में है। देखा जाए तो सरकार पशुपालन एवं डेयरी विभाग से न तो प्रशासनिक तौर पर संतुष्ट रही और न ही परिणामों के आधार पर। ऐसे में सरकार के ढाई साल पूरा होने के बाद अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है। और यह भी एक वजह लखन पटेल से विभाग छीनने को लेकर मानी जा सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अब सीधे तौर पर विभागीय उपलब्धियों को लेकर जिम्मेदारी संभालेंगे। ऐसे में परिणाम मिलने की संभावनाओं में बढ़ोतरी की अपेक्षा तो की ही जा सकती है। और शायद इसलिए विभाग छीनते समय मोहन के मन में लखन के प्रति यही भाव आया होगा कि तुम तो आनंद करो ‘लखन’… पशु पालवे को काम कर ले तुमरो भैया ‘मोहन’… अब केन्द्रीय नेतृत्व या संघीय नेतृत्व का हुकुम तो मानना ही पड़ेगा, भले ही लखन को
पशुपालन विभाग से गमन करवाना पड़े।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं