इंदौर में वालेंटियर ट्रैफिक वार्डन के तौर पर काम करने वाली शुभी जैन के दो मिनट के वीडियो ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ हाईकोर्ट लगातार शहर की खराब ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को फटकार लगा रहा है।

वहीं दूसरी तरफ ट्रैफिक व्यवस्था संभालने में Indore Police की मदद कर रहे वालेंटियर के साथ ही पुलिस के खराब व्यवहार के आरोप सामने आए हैं

शुभी जैन ने वीडियो में आरोप लगाया कि विवाद सुलझाने पहुंचने पर एक पुलिसकर्मी ने उनसे ‘लेडीज जात’ कहकर बात की। उन्होंने बताया कि सिग्नल पर एक पुलिसकर्मी बाइक से आया था। बाइक पर एक आरोपी और पुलिसकर्मी दोनों मौजूद थे। पुलिसकर्मी उस समय वर्दी में नहीं था।
जैन के मुताबिक, वहां ई-रिक्शा चालक और पुलिसकर्मी के बीच विवाद हो रहा था। वह मामला शांत कराने के लिए मौके पर पहुंची थीं। इसी दौरान पुलिसकर्मी ने ई-रिक्शा की फोटो खींचकर चालान बनाने की कोशिश की। शुभी का कहना है कि यह काम उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं था।जब उन्होंने इसका विरोध किया तो पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर कहा किकटा चुभी ने इस पूरे माल पा बनाकर पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।

इस तरह पुलिस व्यवहार करेंगी तो लोग कैसे विश्वास करेंगे
शुभी जैन ने कहा कि अगर पुलिस ही आम लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार करेगी, तो लोगों का भरोसा कैसे बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि वह ट्रैफिक वार्डन के रूप में सेवा दे रही हैं और हमेशा लोगों से मुस्कान के साथ बात करती हैं। उनका उद्देश्य आम जनता और पुलिस के बीच भरोसा बनाए रखना है, ताकि विवाद की स्थिति न बने।उन्होंने कहा कि सड़क पर होने वाले कई विवाद रोड रेज की वजह से बढ़ जाते हैं। ऐसे में पुलिस को देखकर लोगों के मन में डर नहीं, बल्कि सुरक्षा का भाव आना पुलिस का व्य पाटण, जिससे आम लागु सुरक्षित महसूस करें।

ट्रैफिक डीसीपी यह बोले
वहीं इस मामले में ट्रैफिक डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है। मामले में अधीनस्थ अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।गौरतलब है कि हाल ही में एक डीसीपी की कार से बुजुर्ग और बच्चे को टक्कर लगने का मामला भी सामने आया था। इस घटना का वीडियो भी सामने आया था, लेकिन अब तक मामले की जांच ही चल रही है और कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
दूसरी ओर आम लोगों के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस की सख्ती लगातार जारी पम तोड़ने पर चा ईआर तक दर्ज बीच एमपी हाईकोर्ट भी ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर पुलिस को कई बार फटकार लगा चुका है।हाईकोर्ट ने कहा था कि कोर्ट के सामने ही ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं होता। लोग हूटर लगी गाड़ियों से निकलते हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा था कि पुलिस का ध्यान ज्यादातर ड्रिंक एंड ड्राइव के चालान बनाने तक सीमित रह गया है।