मोदी- शिवराज और ‘अपनापन’… कौशल किशोर चतुर्वेदी

मोदी- शिवराज और ‘अपनापन’…
आखिरकार, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अब राजनेता के साथ-साथ लेखक भी बन ही गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रित पुस्तक ‘अपनापन’ लिखकर शिवराज ने संग अपने 35 साल के संग को सार्वजनिक किया है। राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले और मीडिया से जुड़े लोग अभी तक मोदी-शिवराज के बीच संबंधों को मधुरता की कसौटी पर कसने में कंजूसी करते रहे हैं। शायद पुस्तक ‘अपनापन’ के जरिये शिवराज ने मोदी के साथ उनके मधुर संबंधों में कंजूसी बरतने वालों की सोच को बदलने का एक
प्रयास किया है। 26 मई 2014 को जब नरेन्द्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उसके बाद राजनैतिक कयासों में यह चर्चा जोरों पर थी कि मध्य प्रदेश में शिवराज के मुख्यमंत्री बने रहने पर
संशय के बादल छा चुके हैं। लेकिन शिवराज मुख्यमंत्री बने रहे। पर तब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्य प्रदेश दौरों में हमेशा मंच साझा करते मोदी-शिवराज संबंधों को आंकने की लगातार कोशिश हुई और यही बात सामने आई कि मंच पर दोनों के बीच आपसी संबंधों में मधुरता की कमी का आभास होता है। खासतौर पर मोदी के चेहरे के भावों के आधार पर हमेशा आकलन किया जाता रहा कि मोदी के मन में शिवराज के प्रति अपनेपन का अभाव है। पर अब शायद पुस्तक ‘अपनापन’ के जरिए शिवराज ने यही साबित करने की कोशिश की है कि उनके मन में मोदी के प्रति ‘अपनापन’ का भाव हमेशा ही था, है और आगे भी बना रहेगा। और मोदी के संग उनकी लंबी राजनैतिक यात्रा पारस्परिक अपनेपन से भरी रही है। हालांकि राजनीति को समझ पाना आम आदमी के वश की बात नहीं है। किसी भी राजनेता का कौन सा कदम किन संकेतों की तरफ इशारा करता है, यह समझ पाना एक कठिनतम पहेली को सुलझाने की तरह ही है।
फिलहाल हम शिवराज के शब्दों में ही पुस्तक ‘अपनापन’ की चर्चा करते हैं। लेखक के रूप में शिवराज ने पुस्तक अपनापन के लोकार्पण अवसर पर साझा किया कि आज 26 मई एक ऐतिहासिक दिन है— इसी दिन मोदी जी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूँ और अभिनंदन करता हूँ। जीवन में कभी-कभी ऐसे व्यक्तित्व के साथ काम करने का अवसर मिलता है, जिसे दुनिया नेता कहती है, लेकिन वास्तव में वे एक साधक, कर्मयोगी और असाधारण इंसान होते हैं। मेरे लिए मोदी जी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपना जीवन देशसेवा को समर्पित किया है। मेरा और उनका साथ आज का नहीं, बल्कि लगभग 35 वर्षों पुराना है। इन 35 वर्षों में मैंने उन्हें हर क्षण देश के लिए जीते और समर्पित भाव से काम करते हुए देखा है। उनसे मैंने जो अनुभव प्राप्त किया, उसे ‘अपनापन’ पुस्तक के माध्यम से देश को समर्पित कर रहा हूँ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एक कल्पनाशील मस्तिष्क और दूरदृष्टा नेता हैं। एआई, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से देश को बदलने का उनका स्पष्ट विजन है। मैंने उनके भीतर तकनीक के जरिए भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का अद्भुत जज्बा देखा है। मोदी जी का दिल हमेशा कार्यकर्ताओं के लिए धड़कता है। मेरा और नरेन्द्री मोदी जी का साथ एकता यात्रा से शुरू हुआ। उस यात्रा के संचालन की पूरी जिम्मेदारी आदरणीय मोदी जी को सौंपी गई थी। स्वर्गीय प्रमोद महाजन जी ने मुझे फोन कर कहा कि युवाओं को जोड़ने के लिए “केसरिया वाहिनी” बनाई जा रही है, और मुझे उसका संयोजक बनकर काम करना है। इस पूरे वाकये को साझा करते हुए शिवराज ने बताया कि काम के प्रति जितने कठोर मोदी जी हैं, कार्यकर्ताओं के प्रति उतने ही संवेदनशील भी हैं।
शिवराज ने साझा किया कि मोदी जी का अपनापन केवल कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के हर नागरिक के लिए है। उनके मन में सबके प्रति अपनेपन और आत्मीयता का भाव है, इसलिए आज देश “मोदी का परिवार” कहलाता है। उनका यह अपनापन केवल जनता तक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए पूरी दुनिया तक फैला हुआ है। यही व्यापक अपनापन और विश्वकल्याण की भावना उन्हें वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान देती है। मैंने इसी भावना और व्यक्तित्व को अपनापन पुस्तक में उतारने का प्रयास किया है। मैं आप सबसे आग्रह करता हूँ कि इस पुस्तक को जरूर पढ़ें। मुझे विश्वास है कि इसे पढ़कर आपको अपने क्षेत्र में और अधिक ऊर्जा, समर्पण और प्रेरणा के साथ काम करने की शक्ति मिलेगी।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज ने रीवा आए प्रधानमंत्री मोदी की यादों को ताजा करते हुए कहा कि वह हमेशा समय से पहले देश की जरूरतों को समझकर कदम उठाने वाले नेता रहे हैं। तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व और आत्मीय मानवीय स्पर्श पर केंद्रित शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ का भव्य लोकार्पण पूर्व उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की उपस्थिति में हुआ है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मोदीजी का अपनापन, कर्म और राष्ट्रभाव रेखांकित किया। तो वेंकैया नायडू ने शिवराज की जननेता के रूप में खूबियों का खुलकर बखान किया। तो मोदी को शिवराज की उनके संग 35 साल की राजनैतिक यात्रा के नजरिए से जानना है तो ‘अपनापन’ को पढ़ना जरूरी है… तभी जिज्ञासा को शांत किया जा सकता है और मोदी-शिवराज के बीच अपनेपन की भावना को भी जिया जा सकता है।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

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