‘इसरो’ से वैज्ञानिकों के इस्तीफे और ‘मिशन आगमन’ की सफलता के मायने… कौशल किशोर चतुर्वेदी

‘इसरो’ से वैज्ञानिकों के इस्तीफे और ‘मिशन आगमन’ की सफलता के मायने…
देश के स्पेस स्टार्टअप्स का बढ़ता असर अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो तक पहुँच गया है।
स्टार्टअप सेक्टर ने देश में कई क्षेत्रों में नए मानक स्थापित किए हैं, लेकिन अब इसने प्रतिष्ठित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो को भी झकझोर दिया है। अब अंतरिक्ष विभाग ने अपने वैज्ञानिकों के इस्तीफे स्वीकार करने के नियमों में बदलाव किया है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि पिछले एक साल में अनुमानित 100-120 वैज्ञानिक इसरो छोड़कर स्पेस स्टार्टअप्स से जुड़ गए हैं।
केंद्र सरकार के इस विभाग ने एक ऑफिस मेमोरेंडम में कहा है कि उसने गगनयान और अन्य अहम मिशनों या परियोजनाओं से जुड़े ग्रुप ‘ए’ के वैज्ञानिक के अलावा तकनीकी कर्मियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) और इस्तीफे के अनुरोध को अब सामान्य प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। यानी इसरो के अलग-अलग केंद्रों के निदेशकों या प्रमुखों के पास इस्तीफा स्वीकार करने का अधिकार अब नहीं रहेगा।
यह चिंता की बात भी है और राष्ट्र हितों के प्रतिकूल भी है। लेकिन निजी सेक्टर में अंतरिक्ष संबंधी मिशन की सफलता की अगर देश चाहत रखता है तब यही वैज्ञानिक अपनी परफॉर्मेंस के जरिए इसे संभव बना सकते हैं। और शायद हो भी यही रहा है। 18 जुलाई 2026 का दिन इसलिए खास बनकर देश के इतिहास में दर्ज हो गया है। देश का पहला प्राइवेट रॉकेट स्काईरूट एयरोस्पेस का ‘विक्रम-1’ लॉन्च कर दिया गया है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने बताया कि इस रॉकेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ से लिखा एक पोस्टकार्ड है, जिस पर ‘वंदे मातरम’ लिखा है। इस लॉन्चिंग के साथ अंतरिक्ष में भारत एक और छलांग लगाने में सफल हो गया।
तो अंतरिक्ष में यदि भारत ने अंतरिक्ष मिशन में एक और उपलब्धि दर्ज कर ली है। स्काईरूट एयरोस्पेस के ‘विक्रम-1’ रॉकेट की श्रीहरिकोटा से सफल लॉन्चिंग हो गई। इसकी लॉन्चिंग से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिशन की जमकर तारीफ की। उन्होंने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक नया ऐतिहासिक अध्याय बताया। पीएम मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को इस ऐतिहासिक प्रक्षेपण के लिए शुभकामनाएं दीं और कामना की कि विक्रम-1 नई ऊंचाइयों को छुए, इतिहास रचे और नई खोज के लिए आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करें।
देश के पहले प्राइवेट रॉकेट से जुड़ी खास बातें यह हैं कि ‘विक्रम-1’ भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट है। इसे सैटेलाइट को ऑर्बिट में पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।विक्रम-1 के ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल को पूरी तरह से 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन से पावर मिलती है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल में इस तरह के इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है।मिशन ‘आगमन’ नाम से इसका प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-एसएचएआर) के फर्स्ट लॉन्चिंग पैड से की गई। विक्रम-1 की इस परीक्षण उड़ान के साथ ही भारत वैश्विक निजी कक्षीय प्रक्षेपण बाजार में प्रवेश कर गया है। पूरी तरह एक भारतीय निजी कंपनी की ओर से विकसित विक्रम-1 देश का पहला निजी निर्मित कक्षीय प्रक्षेपण यान है। इसे भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मिशन ‘आगमन’ का विक्रम-एस सबऑर्बिटल रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है। इस मिशन के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तलिखित ‘वंदे मातरम’ संदेश वाला एक पोस्टकार्ड भी विक्रम-1 प्रक्षेपण यान के साथ भेजा गया है। स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह हाथों से लिखित संदेश परीक्षण उड़ान में शामिल विशेष पेलोडों में से एक होगा।
कंपनी ने बताया कि मिशन में स्काईरूट टीम के सदस्यों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और दुनिया भर के शुभचिंतकों के हस्तलिखित संदेश भी शामिल किए गए हैं। कंपनी ने इसे कई हाथों से मनाया गया और लाखों लोगों की ओर से साझा किया गया एक उत्सव बताते हुए कहा कि ये स्मृति-चिह्न भारत के उभरते प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम के प्रति सामूहिक समर्थन और आकांक्षाओं का प्रतीक हैं। कंपनी के अनुसार, ये प्रतीकात्मक पेलोड उस साझा दृष्टि और सहयोगात्मक प्रयासों को भी दर्शाते हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष अन्वेषण और नवाचार के क्षेत्र में भारत के नए दौर को आकार देने में योगदान दिया है।
स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों की तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा और वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2026 को सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक नया ऐतिहासिक अध्याय। उन्होंने देशवासियों, खासकर युवाओं से आग्रह किया कि इस ऐतिहासिक मिशन को देखें और ‘इंडिया विद विक्रम-1’ का उपयोग करते हुए टीम स्काईरूट को अपनी शुभकामनाएं दें।
तो वास्तव में स्काईरूट शुभकामनाओं की पात्र है, लेकिन सरकारी सिस्टम को
नुकसान पहुंचाकर उपलब्धियों का नया अध्याय लिखा जाना राष्ट्रहित में होते हुए भी कहीं न कहीं इसरो जैसी अंतरिक्ष संस्थाओं के लिए अहितकर ही साबित होगा। ऐसे में सरकार की इस्तीफा मंजूर करने की नीति में बदलाव का कदम ठीक है लेकिन अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम कर रही निजी संस्थाओं को खुद भी वह सभी कदम उठाने पड़ेंगे जिससे अंतरिक्ष के क्षेत्र में इसरो जैसी संस्थाओं के योगदान को कोई नुकसान न पहुंचे…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं